वन के इकोतंत्र का वर्णन कीजिए?

वन के इकोतंत्र का वर्णन

उत्तरवन इकोतंत्र (Forest ecosystem)— जमीन के कुल क्षेत्रों में से 40% भाग में जल पाए जाते 1 हैं। भारत में कुल क्षेत्रफल का लगभग भाग वनों से आच्छादित है। वनों के पारिस्थितिक तंत्र के विभिन्न 10 घटक निम्नानुसार हैं –

(1) अजीवीय घटक (Abiotic components)— इसके अंतर्गत वनभूमि एवं वातावरण में स्थित अकार्बनिक एवं कार्बनिक पदार्थ आते हैं। वन में विभिन्न प्रकार के मिनरल एवं पत्ते भी समशीतोष्ण वनों में पाए जाते हैं।

(2) जीवीय घटक (Biotic components) वन पारिस्थितिक तंत्र में निम्नलिखित जैवीय घटक (Biotic components) होते हैं –

(i) उत्पादक (Producers)—इसके अन्तर्गत सभी पौधों एवं बास आदि की हरी पत्तियाँ आती हैं, जो कि प्रकाश-संश्लेषण कर भोजन का निर्माण करती हैं। ऊंचे वृक्ष सूर्य प्रकाश का सबसे अधिक उपयोग करके भोजन निर्माण करते हैं जबकि बचे हुए प्रकाश को घास शाक आदि उपयोग कर भोजन निर्माण करते हैं। (ii) उपभोक्ता (Consumers)—वनों में निम्नलिखित मुख्य उपभोक्ता पाये जाते हैं-

(a) प्राथमिक उपभोक्ता (Primary consumers) — इस श्रेणी के अन्तर्गत शाकाहारी कीट, खरगोश, हिरन, हाथी, सुअर, घोड़े आदि आते हैं। ये उत्पादकों द्वारा निर्मित भोजन को ग्रहण करते हैं।

(b) द्वितीयक उपभोक्ता (Secondary consumers) ये प्राथमिक उपभोक्ता को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं अर्थात् ये प्राथमिक मांसाहारी जंतु होते हैं। इस श्रेणी में बिल्ली, भेड़िया, साँप, चील, गिद्ध आते हैं। (c) तृतीयक उपभोक्ता (Tertiary consumers)—इस श्रेणी के जन्तु मांसाहारी होते हैं और प्राथमिक एवं द्वितीयक उपभोक्ताओं को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। ये बड़े आकार के मांसाहारी जन्तु होते हैं,

जैसे- शेर, चीता आदि।

(iii) अपघटक (Decomposers) – जब उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं की मृत्यु हो जाती है तो उसके मृत शरीर को अपघटक अपने भोजन के रूप में उपयोग करते हैं और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखते हैं। ये शरीर के जटिल कार्बनिक पदार्थों को साधारण यौगिक एवं तत्वों में परिवर्तित करके उसको मृदा में मिलाने में सहायक होते हैं। इस श्रेणी में सूक्ष्मजीव जैसे-बैक्टीरिया एवं फफूँद (Fungi) आते हैं।


Published by Naveen

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