विषाक्तता की परिभाषा दीजिए एवं विष के वर्गीकरण का वर्णन कीजिये। विष का रेखांकित वर्गीकरण करते हुए संक्षारित विषों का विस्तार से वर्णन कीजिये।
अथवा
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए
(i) संक्षारित एवं प्रदाही विष (Corrosive and Irritants Toxicants),
(ii) दैहिक अथवा शारीरिक विष (Systemic Toxicants) । (iii) विषकारक (Toxicant)।
उत्तर-
विषाक्तता (Toxicity) –
विषाक्तता एक पारिभाषिक शब्द है, जिसको सामान्यतः एक रासायनिक पदार्थ की दूसरे रासायनिक पदार्थ से तुलना के लिए उपयोग किया जाता है।
ऐसे रासायनिक पदार्थ को हम विष की श्रेणी में रखते हैं, जो कि सजीव जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं। नुकसान पहुँचाने की इस क्रिया को विषाक्तता (Toxicity) कहते हैं।
विषाक्तता को कई लोगों ने अपने तरीके से परिभाषित किया है। उसमें से कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं —
“विषाक्तता रासायनिक पदार्थ का एक आपेक्षिक गुण या कार्यक्षमता होता है, जिससे सजीव जीवों में हानिकारक प्रभाव पड़ता है ।”
“विषाक्तता (Toxicity) एक पदार्थ में अंतर्निहित कार्य क्षमता है, जो कि सजीव जीवों पर हानिकारक प्रभाव डालती है “
विष का वर्गीकरण (Classification of toxicants) –
विष ऐसा रासायनिक पदार्थ है, जो कि मनुष्य के शरीर के किसी भाग के संपर्क में आने या शरीर के अंदर प्रविष्ट कर जाने पर शरीर को नुकसान पहुँचाता है।
या फिर रोगग्रस्त कर देता है, परंतु जीवाणुओं के विष (Bacterial toxicants) को सामान्यतया विष के रूप मान्य नहीं किया जाता है। विष को उनके लक्षणों के आधार पर निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है—
1. संक्षारित (Corrosive)—इस श्रेणी में ऐसे विष आते हैं, जो कि शरीर के जिस भाग के रूपर्क में आते हैं, वहीं पर स्थिर होकर असर दिखाते हैं और उस सतह को नुकसान पहुँचाते हैं। इसकी उपस्थिति से ऊतकों से जल की हानि होती है तथा प्रोटीन्स (द्रव अवस्था) जम जाती है। जैसे
(i) तीव्र अम्ल (Strong acids)—गंधक अम्ल (Sulphuric acid); नाइट्रिक अम्ल (Nitric acid); हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Hydrochloric acid); ऑक्सेलिक अम्ल (Oxalic acid) आदि ।
(ii) तीव्र क्षार (Strong alkalies) – NaOH, KOH, Na2CO, आदि। (iii) यांत्रिकी (Mechanical) — हीरे की धूल, काँच का पावडर आदि ।
2. प्रदाही (Irritants)—ये ऐसे रसायन होते हैं, जो कि शरीर के संपर्क में आने पर उस भाग को उत्तेजित करते हैं एवं खुजली होती है, जिससे शरीर का वह भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है। जैसे
(i) अकार्बनिक (Inorganic)—इस श्रेणी में फॉस्फोरस, क्लोरीन, ब्रोमीन एवं आयोडीन से बने हुए अधातुयी (non metallic) रसायन तथा आर्सेनिक, एंटीमनी, पारा, ताँबा, जस्ता, सीसा आदि से बने हुए धातुयी (Metallic) रसायन आते हैं।
(ii) कार्बनिक (Organic) — इस श्रेणी में पौधों से प्राप्त कुछ कार्बनिक पदार्थ, जैसे- अरंडी, क्रोटान, केलोट्रोपिस आदि से प्राप्त तथा प्राणियों के अंतर्गत सर्प एवं कीट का काटना आदि क्रियायें सम्मिलित हैं।
(iii) यांत्रिकी (Mechanical)— इस श्रेणी में काँच का पावडर, हीरे की धूल आदि आते हैं।
3. दैहिक (Systemic)—इस श्रेणी में मस्तिष्क को प्रभावित करने एवं नुकसान पहुँचाने वाले अफीम (Opium), नींद की औषधि (barbiturates), ऐल्कोहॉल, ईथर, क्लोरोफॉर्म, धतूरा, भाँग आदि पदार्थ आते हैं।
सुषुम्ना (Spinal) को नुकसान पहुँचाने वाले नक्स वोमिका (Nux vomica), जेल्सेमियम तथा हृदयी संवहनीय दवाईयाँ एकोनाइट, कृनेन, तंबाखू आदि मुख्य पदार्थ आते हैं।
4. विविध (Miscellaneous ) — इस श्रेणी में भोजन विषाक्ता आदि आते हैं।