विष विज्ञान की अवधारणा को समझाइए।

विष विज्ञान की अवधारणा को समझाइए।


उत्तर-

विषविज्ञान (Toxicology) –

विषविज्ञान का सामान्य अर्थ होता है कि इस विज्ञान के तहत रासायनिक पदार्थों का विभिन्न प्रकार के जैविक तन्त्रों एवं मनुष्य पर हानिकारक प्रभाव के अध्ययन से होता है जिसके तहत विषों की प्रकृति, गुणों, प्रभाव एवं उनकी पहचान करते हैं विषविज्ञान में रासायनिक व मानवजनित एवं प्रतिजैविक पदार्थों के हानिकारक प्रभाव के गुणात्मक एवं परिमाणात्मक अध्ययन किया जाता है। इस विज्ञान में रासायनिक पदार्थों की सांद्रता जो कि वातावरण में पाई जा सकती है उसका भी अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार विपविज्ञान के तहत वातावरण में रासायनिक पदार्थों का आना-जाना, रूपान्तरण व फैलने संबंधी तथ्यों का भी अध्ययन किया जाता है।

विषविज्ञान इस बात पर जोर देता है कि कोई जीव रसायनों की विभिन्न सांद्रता पर कैसे प्रतिक्रिया करता है। विषविज्ञान के वैज्ञानिक इस बात पर पूरा जोर देते हैं कि विभिन्न प्रकार के रसायनों का परीक्षण करने के लिए मॉडल जीवों का उपयोग कैसे किया जाय जिससे रसायन की एकाग्रता का अनुमान लगाने में मदद मिलती है। रसायन जो विभिन्न प्रकार के होते हैं एवं उन्हें लोगों द्वारा दैनिक जीवन में उपयोग किया जाता है, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कठोर परीक्षण से गुजरना होता है। विषविज्ञान के मूलभूत अवधारणा में विषाक्त पदार्थों में नये विषाक्त पदार्थों को वर्गीकृत करने और उनकी रासायनिक संरचना को समझने के लिए किया जाता है। अतः हम यह कह सकते हैं कि विपविज्ञान “जहर का विज्ञान” है। यह जीवों पर भौतिक एजेन्टो या रसायनों के विरोधी प्रभावों का अध्ययन है। विषविज्ञान के प्रमुख सिद्धान्त के अनुसार वातावरणीय विषैले पदार्थों का मनुष्य और अन्य जीवों के प्रति पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव के बारे में विस्तृत अध्ययन करने से है एवं फोरेन्सिक विपविज्ञान की पूरी जानकारी प्राप्त करना एवं आर्थिक विपविज्ञान के तहत् उन रासायनिक पदार्थों का अध्ययन करना है जो विभिन्न जैव तंत्रों के लिए अथवा कुछ विशिष्ट जीवों का दमन करने के काम आते हैं तथा रसायनों का प्रयोग आर्थिक आधार पर ही किया जाता है। इस प्रकार विषविज्ञान की मूल अवधारणा सम्बन्धित जीवों पर रासायनिक पदार्थों के प्रतिकूल प्रभावों तथा उसकी सम्भावनाओं से हैं।

Published by Naveen

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