किण्वन प्रक्रिया को समझाइये ।
उत्तर-
किण्वन प्रक्रिया (Fermentation process)- किण्वन एक लैटिन शब्द फेरवेर (fervere) से लिया गया है जिसका अर्थ होता है- ‘उबाल करना’ (to boil) । यह नाम इसलिए हुआ क्योंकि माल्ट के दानों और फलों पर यीस्ट से CO, गैस बनती है। उबलते हुए तरल पदार्थ की सतह पर बुलबुले फटते हैं यह गैस के बुलबुले इसलिए निकलते हैं क्योंकि शुगर का इथेनॉल और CO2 में ब्रेकडाउन होता है।
जैव-रासायनिक कार्बनिक यौगिकों के अपचय द्वारा ऊर्जा के उत्पादन के रूप में किण्वन को परिभाषित करते हैं। औद्योगिक सूक्ष्मजीवविज्ञानी किण्वन को सूक्ष्मजीवों का वह मेटाबोलिक प्रक्रिया मानते हैं जिसमें साधारण कच्चे माल को मूल्यवान उत्पादों में बदला जाता है।
किण्वन दो प्रकार की होती है-
(i) वायुवीय किण्वन (Aerobic fermentation),
(ii) अवायुवीय किण्वन (Anaerobic fermentation)।
वायुवीय किण्वन में बड़ी मात्रा में हवा से सूक्ष्मजीवों की आपूर्ति की जाती है जबकि अवायुवीय किण्वन में हवा की आपूर्ति नहीं की जाती है। माइक्रोबियल उद्योग में किण्वन एक इकाई है। यह एक रासायनिक
संगठन के रूप में होता है। किण्वन की प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में सूक्ष्मजीवों का उत्पादन किया जाता है और एक निश्चित अवधि के बाद उनका उपयोग किया जाता है। माइक्रोबियल कोशिकाओं, एंजाइमों, तथा पत्तियों के उत्पादन के लिए किण्वन प्रक्रिया अपनायी जाती है और इससे महत्वपूर्ण व मूल्यवान प्रोडक्ट का उत्पादन किया जाता है।