बायोलीचिंग क्या होता है ? समझाइये |
उत्तर—
बायोलीचिंग (Bioleaching ) – सूक्ष्मजैविकीय की महत्वपूर्ण विधि में से एक बायोलीचिंग विधि होती है जिसमें धातु के घुलने की प्रक्रिया सूक्ष्मजीवाणुओं के द्वारा की जाती है जीवाणुओं द्वारा लीचिंग प्रकृति में कच्ची धातु की खदानों में संसार भर में वर्षों से होती रही है अतः बायोलिचिंग की विधियाँ एवं तकनीकियाँ उन सूक्ष्मजीवाणुओं की जनसंख्या एवं खनिज पदार्थ की दशा के अनुसार निश्चित की जाती है। निम्न श्रेणी के ऑक्साइड एवं सल्फाइड कच्चे खनिजों से ताँबा प्राप्त करने के लिए अम्बार लिचिंग नामक जल धातुकर्मी विधि अनेक वर्षों से प्रचलित है। अम्बार लिचिंग एक सरल विधि है। इस विधि में गुरुत्वाकर्षण द्वारा लिचिंग घोल अम्बार में संचारित किया जाता है। इसके पश्चात् उस घोल में घुल गये ताँबे को रद्दी लोहे के साथ सीमेन्टीकरण विधि से प्राप्त किया जा सकता है। निस्तारित घोल को पुनः अम्बार के शिखर से उसमें परिसंचरित कर दिया जाता है। बायोलिचिंग का उपयोग सोना, यूरेनियम, आदि अनेक मूल्यवान धातुओं को निकालने के लिए सफलतापूर्वक किया जा रहा है। यह विधि यूरेनियम खदान से यूरेनियम निकालने के लिए काफी उपयुक्त होती है।